Saturday, November 26, 2016

पुराण के लक्षण

- पुराण के लक्षण
‘सर्गश्च प्रति सर्गश्च वंशो मन्वन्तराणि च ।
वंशानुचरितं चैव पुराणं पञ्च लक्षणम् ।।
वेद माता गायत्री के सांगोपांग व्याख्यान श्रीमद् देवी भागवत में है अन्य में नहीं.
2- भागवत की परिगणना कई पुराणों के आधार पर पांचवीं है और श्रीमद्भागवत के आधार पर वह अठारहवां पुराण है क्योंकि सत्रह पुराणों की रचना से भगवान् वेदव्यास जी को शान्ति नहीं मिली तब अठारहवां पुराण श्रीमद्भागवत की रचना कर व्यास संतृप्त हुए.
३- उपलब्ध देवनागरी संस्करणों में श्रीमद्भागवत पुराण में १४६२५ श्लोक है जब कि श्रीमद्भागवत के आधार पर १८००० श्लोक होने चाहिए थे वे नहीं हैं इस लिए श्रीमद्भागवत को महा पुराण मानना संदिग्ध है. जब कि देवी भागवत १८००० से कुछ अधिक श्लोक विद्यमान हैं. श्रीमद भागवत की भाषा शैली दो प्रकार की है एक – पुराणों में प्रतिपादित शैली दो- आधुनिक कवियों ( कालिदास, माघ, भारवी और श्री हर्ष की शैली अधिकतम बड़े उल्लिखित श्लोक इसी शैली में है.
४- हमारा प्रश्न अन्य पुराणों के सम्बन्ध में नहीं है विष्णु पुराणों में वर्णित विषय ही कुछ विस्तार के साथ श्रीमदभागवत में है. विष्णु पुराण के पुराणत्व में कोई संशय भी हमें नहीं है.
५- अठारह पुराणों की गणना इस प्रकार है –
म द्वयं भद्वयं चैव ब्र त्रयं व चतुष्टयम् !
अनाप लिंग कू स्कानि पुराणानि विदुर्बुधाः!!
म द्वयं = मत्स्य पुराण , मार्कंडेय पुराण,
भद्वयं = भागवत पुराण, भविष्य पुराण,
ब्र त्रयं = ब्रह्म पुराण, ब्रह्मपुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण,
व चतुष्टयम् = विष्णु पुराण,वराह पुराण, वामन पुराण और वायु पुराण,
अ= अग्नि पुराण,
ना= नारद पुराण,
प= पद्म पुराण,
लिं= लिंग पुराण,
ग= गरुड़ पुराण,
कू = कूर्म पुराण,
स्क= स्कन्द पुराण
भागवत शब्द= भगवतः इदं भागवतम, भगवत्याः इदं भागवतम्
उपरोकतानुसार कौन सा भागवत है ?
=?>गायत्री को परिभाषित करने वाला या उस को नहीं परिभाषित करने वाला ?
=?>पूर्ण संख्या क्रम वाला श्रीमद देवी भागवत या स्वयं द्वारा उल्लिखित संख्या का उल्लंघन करने वाला?
=?> प्राचीन पौराणिक शैली वाला भागवत या अर्वाचीन काव्य शैली वाला भागवत ?
=?> पिष्ट पेषण वाला या शुद्ध पौराणिक रूप में नव विधा द्वारा जगदम्बा की महिमा का वर्णन करने वाला भागवत ?
६- अठारह पुराणों में छह पुराण वैष्णव हैं ( विष्णु, वामन, मत्स्य, वराह, पद्म, नारद)
छह पुराण शैव हैं (लिंग गरुड़, वायु, कूर्म, स्कन्द, मार्कंडेय)
भविष्य पुराण सौर है, ब्रह्माण्ड पुराण भी सौर है
ब्रह्मपुराण ब्रह्मा से सम्बंधित है, देवी भागवत भगवती जगदम्बा से सम्बंधित है, अग्नि पुराण अग्नि तत्व यज्ञ महिमा, ब्रह्म वैवर्त मिश्रित पुराण है `

७- श्रीमद भागवत में परिगणित श्लोकों की संख्या में कमी क्यों आई ? कैसे भी १८००० पूरे नहीं होंगे फिर भी श्रीमद्भागवत को महापुराण का ढोल पीटा जाता है.
८- श्रीमद्भागवत व्यासपुत्र श्री शुक देव जी ने राजा परीक्षित को सुनाया था. श्रीमाद्देवीभाग्वत स्वयं व्यास जी ने परीक्षित पुत्र जन्मेजेय को सुनाया था. दोनों का सम्बन्ध महाभात से है. श्रीमद्भागवत में वर्णित शुक देव जी दिगंबर योगी हैं वहीँ देवी भागवत में वर्णित शुक देव जी गृहस्थ हैं और कर्म योगी हैं. इस प्रकार दोनों जगह वर्णन में विषमताएं हैं. सत्य क्या है? इस का परीक्षण होना चाहिए.
भेडचाल है कौन किस को रोक सकता है? तथ्यों के आधार पर मैं श्रीमद भागवत को उप पुराण मानता हूँ.
यदि आप के पास श्रीमद्भागवत को महापुराण सिद्ध करने के लिए प्रमाण हों तो कहें.

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